देश के बुद्धिजीवियों के ज्ञान कि- घंटा

देश के बुद्धिजीवियों के ज्ञान कि- घंटा
देश के बुद्धिजीवियों के ज्ञान कि- घंटा

हमारे देश में आजकल बहुत सारे ऐसे सेकुलर हिंदू लोग चर्चित हो रहे हैं । जो अपनी बातों से यह साबित करने पर तुले हैं कि हिंदुत्व और हिंदूवादी लोगों को झुका कर ही रहेंगे । इन लोगों को तभी कोई तकलीफ नहीं होती है, जब कोई हिंदू किसी एक धर्म और समुदाय के द्वारा प्रताड़ित होता है ,परंतु उन्हें तब बहुत ही ज्यादा दुख और संवेदनाएं होती है । जब कोई किसी एक धर्म का व्यक्ति 125 करोड़ की आबादी में भीड़ का शिकार होता है , यह लोग आलोचना करते करते इतने खोखले हो चुके हैं । कि इनके  पास किसी तथ्य को परखने की सोच नहीं है । बस इन लोगों को विरोध करना है, और गालियां देनी है । क्योंकि भाई इन सब को नेता जो बनना है , खुद को सेकुलर कहने वाले लोग दरअसल विरोध करते करते ऐसे एक तरफा हो गए हैं । के इन्हे एक तरफ की ही बात दिखाई देती है ।  इन लोगों के मुंह से हिंदुओं की प्रशंसा सुनने को कभी भी नहीं मिलेगी, परंतु आलोचना ही हमेशा करते रहेंगे ,यह मानते हैं कि इन पर जिम्मेदारी का बोझ इन पर इतना है, कि बस देश देश का भार इन्होंने ही उठा रखा है । अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संविधान के नाम पर यह लोग विश्व स्तर पर देश को हमेशा नीचे दिखाते आए हैं ।आज हमारे देश के दुश्मनों को हमारे खिलाफ लड़ने के लिए हथियारों की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हमारे देश में उनके शुभचिंतक नागरिक इतना ज्यादा हैं । कि वह इस देश को नीचा दिखा देंगे ,और वही इस देश को आग लगा देंगे, वही इस देश में उनकी जयजयकार  करेंगे ,सबके सामने सार्वजनिक तौर 100 करोड़ पर 15 करोड़ भारी पड़ेंगे ,इस प्रकार की चुनौती देंगे, पर  हम उनका घंटा कुछ उखाड़ नहीं पाएंगे । क्योंकि वह हमारी असंगठित होने की कमजोरी को जानते हैं । और बुद्धिजीवियों को इसमें कुछ भी बुरा नहीं लगता ,उन्हें लगता है कि अरे इसमें क्या बुरी बात है । क्या हो गया अगर किसने नारा लगा दिया तो । क्या हो गया कुछ कह दिया तो, और मैं मानता हूं कि यह ऐसे बुद्धिजीवी लोग ही भारत की इस हालत के जिम्मेदार हैं।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर क्या क्या ज्यादतीयां आज तक होती आई है । उसका कोई हिसाब उनके पास नहीं है ,उनके प्रति उनके मन में कोई संवेदना ही नहीं है । बांग्लादेश और ऐसे अनेक देश जहां पर हिंदुओं की क्या दुर्दशा हो रही है । इन पर कभी यह लोग बात नहीं करेंगे, और चलो एक बार अलग रखा  जाए, तो दूसरे  देशों में  हिंदुओं के विषय को, तो आप याद कीजिए कश्मीर में एक धर्म विशेष के लोगों ने किस प्रकार से कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार किए ,वहां उन बच्चों के साथ महिलाओं के साथ क्या क्या बुरा नहीं हुआ । उनके घर तबाह कर दिए गए उनका जीना दूभर कर दिया गया ,उनको उनके घर से बेदखल कर दिया । गया उन्हें दर-दर भटकने के लिए भगा दिया गया, और यह लोग आज सविधान की बात करते हैं, human rights अधिकार की बात करते हैं । कितनी खोखली है इनकी बुद्धिजीविता जिन्हें सिर्फ एक पक्ष नजर आता है। इन्हें बहुत तकलीफ होती है ,जब किसी धर्म विशेष के लोगों अपराधिक गतिविधियों में पकड़े जाते हैं । परंतु उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता जब बेगुनाह लोग मारे जाते हैं । इनके दिमाग का खुलापन देखिए -इनकी बेशर्मी देखिए- इनकी नैतिकता का स्तर देखिए- कि यह कुछ भी कभी भी किसी भी प्रकार से भी देश के खिलाफ बोल जाते हैं। फ्रीडम ऑफ स्पीच यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग इन लोगों ने जिस प्रकार से किया है ना, यह देश की आम लोगों के लिए इस अधिकार का उपयोग करने में मुश्किल ही पैदा करने वाला है । कोई समाधान नहीं देने वाला ,यह लोग देखते तो अमेरिका की तरफ है ,कि किस प्रकार से वहां का मीडिया स्वतंत्र है । परंतु उन लोगों को शायद यह पता नहीं है कि वहां का मीडिया कभी भी अपने देश की छवि को और अपने देश के मूल्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिराता नहीं है, उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाता है । पर इन्हें क्या- यह तो पता नहीं किस स्तर के बुद्धिजीवी लोग है ।

और हां मैं आपको बता दूं कि मैं जी न्यूज़ नहीं देखता हूं, और ना ही मैं उस कतार में हूं ,परंतु इन सेकुलर लोगों का विश्लेषण जब भी मैं देखता हूं । उनमें मुझे सत्यता का अधूरापन महसूस होता , बात को और खबर को समान दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का इनका ध्यान नहीं होता ,तब मुझे इस बारे में तकलीफ होती है ।

दुनिया के पटल पर -कट्टर हिंदू -भगवा आतंकवाद- हिंदू आतंकवाद ,जैसे शब्दों का उपयोग करते हुए, इन लोगों ने देश में और दुनिया में हिंदुओं को बदनाम किया है । नीचा दिखाया है ।जब बहुत बड़ी अब आबादी  को इस्लामिक आतंकवाद शब्द से तकलीफ है ,तो आप हिंदू आतंकवाद शब्द का उपयोग कैसे कर लेते हैं । इस पर यह विचार कभी नहीं करेंगे ।


यह लोग कहते हैं ,कि हमें सरकार की आलोचना का अधिकार है । परंतु यह भूल ही गए हैं की ,आलोचना कहते किसे है ,आलोचना की मर्यादा है क्या होती है।

जब देश के हितों को देश के लोगों को बचाने का समय आता है । तो सिर्फ बुद्धिजीवीता से काम नहीं चलता निर्णय लेने पड़ते हैं । सरकार के निर्णय का प्रभाव चाहे नकारात्मक व सकारात्मक भी रहे हो। लेकिन इन लोगों को तो आलोचना करना ही है ,जो लोग मानते हैं कि सरकार का दायित्व है, हम लोगों की सेवा करना- परंतु उनसे भी कोई पूछे, कि सरकार के प्रति आपके क्या नैतिक दायित्व हैं । कि उनका पालन आप करते हैं ,
यकीन मानिए जरा भी सच्चाई है ना उनकी आत्मा में तो जवाब नहीं दे पाएंगे लोग ।

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